अस्पताल के अंदर होता है इलाज, बाहर बेची जा रही बीमारी, जिम्मेदार मौन

जौनपुर - जिला अस्पताल इस समय उन समस्याओं से घिरा है जिसका वो जिम्मेदार ही नही है।अस्पताल के डॉक्टर एक मरीज का बढ़िया इलाज करते हैं तो दूसरी तरफ मरीज के परिजन अस्पताल के बाहर बेचे जा रहे धूल मिट्टी के खाद्य पदार्थ का सेवन कर बीमारी को अपने साथ लेकर घर चले जाते हैं।



जौनपुर - जिला अस्पताल इस समय उन समस्याओं से घिरा है जिसका वो जिम्मेदार ही नही है।अस्पताल के डॉक्टर एक मरीज का बढ़िया इलाज करते हैं तो दूसरी तरफ मरीज के परिजन अस्पताल के बाहर बेचे जा रहे धूल मिट्टी के खाद्य पदार्थ का सेवन कर बीमारी को अपने साथ लेकर घर चले जाते हैं।


और जब उन खाद्य पदार्थो का उल्टा असर होता है और वो भी इलाज हेतु अस्पताल का चक्कर लगाने को मजबूर हो जा रहे है ।नाम ना छापने की शर्त पर एक ज़िला अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि, अस्पताल के मुख्य द्वारा पर अवैध खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं जिनका सेवन करना बीमारी को दावत देने के बराबर होती है।


डॉक्टर ने आगे बताया कि, जिला महिला व पुरुष (सदर) अस्पताल के मुख्य द्वार के दोनों तरफ नास्ते की दुकान है जहां धूल मिट्टी सहित छोले,चाट, समोसा व ब्रेड पकौड़ा बेचे जाते हैं। भारी संख्या में मरीज के परिजन इन्ही धूल मिट्टी में लिपटे हुए नास्ते का सेवन कर बीमारी को न्योता देते हैं।जल्द से जल्द इन दुकानदारो पर बड़ी प्रशासनिक कार्यवाही होनी चाहिए।


खाद्य पदार्थ के अधिकारी की लापरवाही शायद जिले के वर्तमान जिलाधिकारी दिनेश कुमार सिंह को नही पता है जिसकी वजह से लापरवाही चरम सीमा हो रही है।बता दें कि इन दुकानों पर महीनों- महीनों पड़ी मिठाइयां भी बेची जा रही। खाद्य विभाग अगर थोड़ा सा सिर्फ अपने जिम्मेदारी पर एहसास करता तो शायद इन दुकानों पर बीमारियां नही बल्कि भोज्य पदार्थ बेचा जाता। खाद्य विभाग के अधिकारियों की जो जिम्मेदारियां है।शायद उन जिम्मेदारियों को निभाने में खाद्य पदार्थ अधिकारी असहज महसूस कर रहे है और बीमारी को उपजने में सहयोग कर रहे हैं।