क्या अभी भी बन सकती है महाराष्ट्र में भाजपा सरकार ?

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के बाद शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी के सामने 50-50 का फॉर्मूला रखते हुए ढाई साल के सीएम की मांग की थी। लेकिन शिवसेना की इस मांग को बीजेपी ने मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद शिवसेना अब एनसीपी-कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की तैयारियों में जुटी है।भाजपा को यह अच्‍छे से पता हैं कि शिवसेना एनसीपीऔर कांग्रेस का गठबंधन शर्तों के कारण कभी भी गेम पलट सकता हैं। इसलिए शिवसेना से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा दूसरे विकल्‍प खुले रखे हैं।



फोटो साभार 


शिवसेना से गठबंधन टूटने के बावजूद भाजपा ने सरकार बनाने की उम्मीद बरकरार रखी हैं। भाजपा महाराष्‍ट्र में विधानसभा में विजयी हुए विधायकों और पार्टी के बड़े नेताओं के साथ लगातार बैठक कर रही हैं।भाजपा को यह अच्‍छे से पता हैं कि शिवसेना एनसीपीऔर कांग्रेस का गठबंधन शर्तों के कारण कभी भी गेम पलट सकता हैं। इसलिए शिवसेना से गठबंधन टूटने के बाद भाजपा दूसरे विकल्‍प खुले रखे हैं। आइए जानते हैं कैसे और क्यों भाजपा ने अभी भी अपनी सरकार बनने की उम्मीदें कायम रखी हैं?


नारायण राणे सरकार गठन के प्रयास में 


नारायण राणे सरकार गठन के लिए बहुमत हासिल करने की मुहिम में जुट गए हैं। पार्टी ने साफ किया है कि वह राज्यपाल के पास तभी जाएगी, जब उसके पास 145 की संख्या होगी। बता दें नारायण राणे जो महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं वह कुछ समय पहले ही भाजपा में आए हैं।


शिवसेना से गठबंधन टूटने के तुरंत बाद से ही नारायण राणे ने मोर्चा संभाल लिया था। पहले भी उन्होंने कहा कि सरकार हम ही बनाएंगे और जब भी राज्यपाल के पास जाएंगे 145 के आंकड़े के साथ ही जाएंगे। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम ने कहा कि बीजेपी की सरकार बनाने के लिए मैं पूरी कोशिश करूंगा। सरकार बनाने के लिए जो करना होगा वो करेंगे। इतना ही नहीं उन्होंने शिवसेना पर भी जमकर हमला बोला था।


बोले नितिन गडकरी 


केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने महाराष्ट्र में सियासी उठापटक को लेकर बड़ा बयान दिया है। नितिन गडकरी ने कहा कि क्रिकेट और राजनीति में कुछ भी संभव है। कब गेम पलट जाए कुछ पता नहीं चलता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट और राजनीति में कभी आपको लगता है कि आप मैच हार रहे हैं, लेकिन परिणाम एकदम उल्टा आता है।


कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना में फसा पेंच 


राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन के बीच कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की ओर से सरकार बनाने की कोशिश जारी हैं। उनके बीच कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर सहमति बन गई है। अब खबर आ रही है कि एनसीपी शिवसेना के साथ सरकार बनाने को इच्छुक है लेकिन ढाई साल के लिए वह अपना सीएम चाहती है।