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ज्वेलर्स लूटकांड खुफिया तंत्र नकारा साबित खुलासे में विलम्ब से चर्चाओं का बाजार गर्म

जौनपुर- श्री महालक्ष्मी ज्वेलर्स लूटकांड का खुलासा न होने से जहां व्यापारियों एवं राजनैतिक दलों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है, वहीं इस प्रकरण पर सर्विलांस प्रभारी ओम नारायणा सिंह व स्वाट प्रभारी विरेन्द्र कुमार पर कार्यवाही करते हुए पुलिस अधीक्षक ने कर्तव्य पालन में लापरवाही पर दोनों को निलम्बित कर दिया है।


छोटी से बड़ी वारदातों के होने पर प्रभारी स्वाट व प्रभारी सर्विलांस की भूमिका अनावरण में होती रही, लेकिन इस बार उन्हे सफलता नहीं मिल सकी और उसका खामियाजा भोगना पड़ा।इस घटना पर अब गाज गिरने का सिलसिला शुरू हो गया है।बताते है कि इस दुस्साहसिक घटना के खुलासे के लिए कई टीमें लगायी गयी है। जो अपने अपने  तरीके से अपराधियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।



इतना ही नहीं जिले में ऐन केन प्रकारेण अनेक उपलब्धियां बटोरने वाले कथित रूप से तेज तर्राक कहे जाने वाले पूर्व थानेदारों को भी वर्क आउट के लिए लगाने की बात सामने आयी है।लेकिन वे भी कोई कारनामा करने में अभी असमर्थ रहे है। इससे यह साफ हो गया कि पुलिस का खुफिया तंत्र कमजोर ही नहीं पूरी तरह से समय समय पर नकारा साबित हुआ है।


पुलिस के खुफया विभाग में अधिकारी और कर्मचारी सिर्फ किसी प्रकार से नौकरी कर वेतन लेने तक ही सीमित रहते है। इसकी वजह से अनेक घटनायें फाइलों में ही बन्द हो जाती है।उक्त दोनों जिम्मेदारों निरीक्षकों के निलम्बन के बाद यह चर्चा होते सुना जा रहा है कि घटना वाले स्थान के बगल में पुलिस चैकी है और लुटेरे वारदात को अंजाम देने के बाद लाइन बाजार होकर भागे थे।


कई स्थानों पर पुलिस की पिकेट ड्युटी रहती है क्या इन सबकी लापरवाही उजागर नहीं हुई।


थाने और चौकी से किसी को भी दण्डित नहीं किया गया, बल्कि स्वाट और सर्विलांस प्रभारी को ही बलि का बकरा बनाया गया।लोगों का कहना है कि शहर के हर तिराहे और चैराहे सहित प्रमुख स्थानों पर पिकेट के  सिपाही तैनात होते है लेकिन वे अपने कर्तव्यों का कितना निर्वहन करते है इसकी समय समय पर समीक्षा होती है अथवा नहीं उन्हे भी सख्ती से जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाने की जरूरत है।


व्यापार मण्डल ने संयुक्त रूप से इस घटना के पर्दाफाश न होने पर नौ नवम्बर को विशाल जूलूस निकालने का 15 नवम्बर को बन्दी का एलान किया है। इसकी तैयारियां भी की जा रही है। पुलिस के लिए लूट काण्ड का खुलासा जहां चुनौती बना हुआ है वहीं खुलासे में विलम्ब अनेक प्रकार की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। 


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