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कोरोना -ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का ट्रायल सही दिशा में,वॉलंटियर्स को दी गई दूसरी डोज l

देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है, जहां पर अब तक 63 लाख से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच एक राहत भरी खबर भी सामने आई है, जिसके तहत भारत में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का ट्रायल सही दिशा में जा रहा है। इस वैक्सीन को कोविशिल्ड के नाम से भी जाना जाता है। अभी तक के ट्रायल के दौरान वैक्सीन के कोई नकारात्मक परिणाम नहीं दिखे हैं। मौजूदा वक्त में देश में इस वैक्सीन के दूसरे और तीसरे चरण का ट्रायल चल रहा है।


वॉलंटियर्स को मिली दूसरी डोज


ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ओर से विकसित और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) की मदद से तैयार हो रही इस वैक्सीन का तीसरा चरण 17 सितंबर को पुणे स्थित ससून जनरल अस्पताल में शुरू हुआ। इसके बाद 23 सितंबर को किंग एडवर्ड मेमोरियल अस्पताल में दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल हुए। इसमें से कुछ वॉलंटियर्स तो ऐसे थे, जिनको वैक्सीन की दूसरी डोज दी गई। इसके बावजूद अभी तक उनमें कोई साइड-इफेक्ट नहीं दिखा है।



फोटो साभार 


कुछ को आया बुखार


ट्रायल से जुड़े वैज्ञानिक के मुताबिक वैक्सीन की डोज देने के बाद कुछ लोगों को बुखार आ गया, लेकिन ये मामूली साइड-इफेक्ट है। इसमें कोई चिंताजनक बात नहीं है। वैज्ञानिकों के मुताबिक आमतौर पर बुखार आना सभी वैक्सीन में सामान्य बात है। इससे पहले सितंबर में एक वॉलंटियर्स के अंदर अस्पष्ट बीमारी दिखी थी, जिसके बाद वैक्सीन के ट्रायल को रोक दिया गया था, हालांकि बाद में ट्रायल फिर से शुरू हो गया। उस दौरान भी वैज्ञानिकों ने वैक्सीन को सुरक्षित बताया था


अमेरिकी कंपनी से है करार


पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया कोविशिल्ड वैक्सीन को तैयार करने में अग्रणी भूमिका निभा रही है। हाल ही में कंपनी की ओर से अमेरिका की कंपनी नोवावैक्स इंक के साथ सप्लाई और लाइसेंस का करार किया गया था। अमेरिका की सेक्युरिटीज एक्सचेंज कमिशन में जो दस्तावेज दाखिल किए गए हैं, उसके मुताबिक कोरोना की वैक्सीन को तैयार करने, उसके को-फॉर्मुलेशन, दवा को अंतिम रूप देने, रजिस्ट्रेशन और बिक्री को लेकर करार हुआ है। दोनों कंपनियों के बीच हुए करार के बाद भारत की कंपनी इस वैक्सीन को भारत में लोगों तक पहुंचाने का काम करेगी।



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